तो आप सब लोगों को पता है कि हमारा शरीर कोशिकासे बना हुआ है और इन कोशिकाओं का हमारे शरीर पर बहुत ही बड़ा प्रभाव होता हैं और उनमें ऐसे ही एक कोशिका आती है जिसका नाम स्टेम सेल हैं।
स्टेम सेल नाम की कोशिका की बीमारियां कम करने में बहुत ही मददगार साबित होती हैं। तो ऐसे में आपको भी स्टेम सेल के बारे में जानकारी होनी चाहिए तो हम आपको स्टेम सेल नाम की कोशिका के बारे में बताने जा रहे हैं।
आज हम आपको उस टाइम सेल से जुड़ी बहुत ही खास बात बता नहीं जा रहे हैं और वह आपके लिए बहुत ही काम लगने वाली है तो यह जानकारी जानने के लिए हमारे अंत तक जरूर बने रहिएगा जिससे आपको स्टेम सेल नाम की कोशिका के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।
स्टेम सेल क्या होती है?
स्टेम सेल ऐसी कोशिका होती है जो शरीर के किसी भी अंग को कोशिका के रूप में विकसित करने की क्षमता होती हैं। यह कोशिका शरीर में कोई भी मौजूद किसी भी प्रकार की कोशिका मैं बदल भी सकती हैं।
वैज्ञानिक के अनुसार इन सेल्स को किसी भी सेल की रिपेयरिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हैं। मतलब की समझ गए कि हार्ट सेल्स खराब हो जाए तो स्टेम सेल की मदद से उसे ठीक किया जा सकता है और अगर आंख की कॉर्निया की सेल्स खराब हो जाए तो भी स्टेम सेल की मदद से उसे विकसित करके ठीक किया जा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि स्टेम सेल को ब्लैंक सेल भी कहा जाता है क्योंकि यह सेल्स अनडिफ्रेंसियस सेल होती है यानी कि ऐसी कोशिकाओं में डिवेलप होने की कैपेसिटी रखती है जो शरीर के डिफरेंट भाग में अलग-अलग फंक्शन करती हैं।
स्टेम सेल से विरोधी हमारे शरीर में मौजूद ज्यादा सेल डिफरेंसिएटेड सेल होती है जो पर्टिकुलर ऑर्गन में स्पेसिफिक हेतु को पूरा कर सकती हैं। जैसे रेड ब्लड सेल्स जिनका काम स्पेसिफिक होता है और यह खून के द्वारा ऑक्सीजन पकड़ने का काम करती हैं।
हमारे शरीर में या लेबोरेटरी में सही कंडीशन में स्टेम सेल्स डिवाइड होकर ज्यादा सेल्स बना लेती है जिन्हें daughter cells कहा जाता हैं।
यह daughter cells या तो नई सेल्स बन जाती है या फिर स्पेशलाइज्ड सेल्स बन जाती है जिनके फंक्शन ज्यादा स्पेसिफिक होते हैं। जैसे कि ब्लड सेल्स, ब्रेन सेल्स, हार्ड मसल सेल्स और बोन सेल्स।
हमारे बॉडी में स्टेम सेल्स किसी और सेल में नई सेल जनरेट करने की एबिलिटी नहीं होती है तो स्टेम सेल्स हमारे बॉडी के लिए कितनी ज्यादा उपयोगी होती है यह तो आपको पता चल ही गया होगा।
स्टेम सेल्स के प्रकार
स्टेम सेल्स के प्रकार में सबसे पहले जिसका नाम आता है उसे एंब्रोयोनिक स्टेम सेल्स कहते हैं।एंब्रोयोनिक स्टेम सेल्स ह्यूमन एंब्रोयो से आती है जो कि 3 से 5 दिन के होते हैं।
इन सेल्स को प्लूरीपोटेंट सेल्स कहा जाता है क्योंकि यह बहुत बॉडी के किसी भी टाइप में कन्वर्ट हो सकती है और ज्यादा स्टेम सेल्स में डिवाइड भी हो सकती हैं। इसके स्पेशलिटी के कारण एंब्रोयोनिक स्टेम सेल्स शरीर के बीमार और ऑर्गन को रिपेयर और रीजनरेट करने के लिए यूज़ किया जाता हैं।
और आगे दूसरी प्रकार की सेल्स होती है जिसका नाम नॉन एंब्रोयोनिक स्टेम सेल्स के नाम से जाना जाता है और नॉन एंब्रोयोनिक स्टेम सेल्स को एडल्ट सेल्स के नाम से भी जाना जाता है और यह सेल्स चिल्ड्रन मैं ही मिलती हैं।
यह सेल्स डिवेलप हो चुके ऑर्गन और टिशू से मिलती है जब कोई टिशु डैमेज होता है तब उसकी रिपेयर या फिर रिप्लेसमेंट के लिए यह सेल का इस्तेमाल हमारा शरीर अपने आप कर लेता हैं। इसके लिए डैमेज टिशू एरिया में मौजूद होते हैं उसी एरिया से एडल्ट सेल का इस्तेमाल करके यह टिशू को रिपेयर या फिर रिप्लेसमेंट कर लिया जाता हैं।
एडल्ट स्टेम सेल्स उतनी ज्यादा सेल्स में डिफरेंट नहीं कर सकती है जितनी टाइप्स की सेल्स में एंब्रोयोनिक स्टेम सेल्स डिफरेंट क्रिएट कर सकती हैं। हेमेटोपोेटिक स्टेम सेल एक प्रकार का एडल्ट स्टेम सेल होती है जो हड्डियों में मिलती है और यह सेल्स नई रेड ब्लड सेल वाइट ब्लड सेल्स जैसी ब्लड सेल्स बनाती हैं।
और आगे बढ़े तो एक और स्टेम सेल्स का प्रकार है जिसका नाम इंड्यूस्ड प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल्स कहा जाता हैं। स्टेम सेल्स पर होने वाली रिसर्चर का हीरिजल्ट है कि साइंटिस्ट की एडल्ट सेल्स से स्टेम सेल बनाने का तरीका पता लगा लिया है और इन सेल्स को इंड्यूस्ड प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल्स कहा जाता हैं।
यह सेल्स बॉडी के सभी स्पेशलाइज्ड सेल्स में डिफरेंस कर सकती है यानी कि यह सेल बॉडी के किसी भी ऑर्गन टिशू के लिए नई कोशिका को बना सकती है जो की बहुत बड़ी बात होती हैं। और अब एक और सेल्स की बात करते हैं।
कार्ड ब्लड स्टेम सेल्स चाइल्ड बर्थ के बाद अंबिलिकल कॉर्ड से प्राप्त होती है और इन सेल्स को सुरक्षित रखा जाता है ताकि भविष्य में इसका जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल हो सके और इन सेल्स का इस्तेमाल करके बच्चों में ब्लड कैंसर, जेनेटिक ब्लड डिसओड जैसी बीमारियों का इलाज किया जाता हैं।
हमारे शरीर के अंदर एम्नायोटिक फ्लूड स्टेम सेल्स भी पाया जाता है लेकिन इनके बारे में अभी तक ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है और इसके बारे में अभी और भी रिसर्च होना बाकी है लेकिन आप यह जरूर जान सकते हैं कि आप यह जरूर जान सकते हैं कि एम्नायोटिक फ्लूड ऐसे सेल्स होता है कि जो एक मां के पेट मै पल रहे बच्चे के चारो तरफ पाया जाता हैं।
स्टेम सेल्स का मेडिसिन मैं कितना महत्व होता है?
स्टेम सेल्स का मेडिसिन में बहुत ज्यादा महत्व है अभी के समय में बीमारियों के लिए जो स्टेम सेल्स यूज किए जाते हैं वह हेमाटोपोेटिक स्टेम सेल्स होती हैं। यह कोशिका कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए ब्लड कोशिकाएं बनाती है क्योंकि कैंसर पेशेंट की बॉडी में मिलने वाली हेमाटोपोेटिक, रेडिएशन थेरेपी और कीमो थेरेपी के कारण खत्म हो जाती हैं। स्टेम सेल्स थेरेपी को को रीजेनरेटिव मेडिसिन भी कहा जाता हैं। यह थेरेपी स्टेम सेल्स का इस्तेमाल करके ऐसे टिशू के रिपेयर रिस्पांस को प्रमोट करते हैं जो डिसिस डिस्फंक्शनल हो या फिर इंजर्ड हो यह थेरेपी ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन का नया और एडवांस चैप्टर है जो और ऑर्गन की बजाएं सेल्स का इस्तेमाल करके बीमारी को ठीक करती हैं। ऑर्गन मिलना बहुत ही मुश्किल होता है जबकि स्टेम सेल्स को लैब में तैयार कर लिया जाता है और पेशेंट के शरीर में in-plant कर लिया जाता हैं।
दोस्तो यह थी आज की एक अमेजिंग जानकारी आशा करता हूं कि आज की जानकारी आपको पसंद आई होगी और अगर आपको ऐसे ही इंटरेस्टिंग टॉपिक्स पढ़ना पसंद है तो हमारे साथ हर रोज बने रहिएगा जिससे आपको भी ऐसी बेहतरीन जानकारी समय-समय पर मिलती रहे।